Sunday, 16 September 2018

Bal Gangadhar Tilak

Bal Gangadhar Tilak born as Keshav Gangadhar Tilak was an Indian nationalist, journalist, teacher, social reformer, lawyer and an independence activist. He was the first leader of the Indian Independence Movement. The British colonial authorities called him “Father of the Indian unrest.” He was also conferred with the honorary title of “Lokmanya”, which literally means “accepted by the people (as their leader)”.
Tilak was one of the first and strongest advocates of “Swaraj” (self-rule) and a strong radical in Indian consciousness. He is known for his quote, “Swaraj is my birthright, and I shall have it!” in India. He formed a close alliance with Muhammad Ali Jinnah, later the founder of Pakistan, during the Indian Home Rule Movement.


Bal Gangadhar Tilak

Acts of violence actually retarded, then hastened, the pace of political reforms, he felt. He was eager for reconciliation with Congress and had abandoned his demand for direct action and settled for agitations “strictly by constitutional means” – a line advocated by his rival Gokhale. Tilak tried to convince Mohandas Gandhi to leave the idea of Total non-violence (“Total Ahinsa”) and try to get Self-rule (“Swarajya”) by all means. Gandhi, though respected him as his guru, did not change his mind. He was the first Congress leader to suggest that Hindi has written in the Devanagari script be accepted as the sole national language of India.

Sunday, 28 January 2018

संघ और उसके राज्य क्षेत्र और नागरिकता ( Union and its territories and citizenship )


concept of citizenship
 states and union territories of india 



[भाग -1]

[संघ और उसके राज्य क्षेत्र (अनुच्छेद 1 – 4 तक)]


अनुच्छेद 1 – भारत जो कि इण्डिया एक राज्यों का संघ होगा।
            संघ ( UNION ) – राज्यों का संघ है। जैसे – भारत।
            FEDERATION – राज्यों का संघ समझौते के द्वारा। जैसे – अमेरिका।

Saturday, 27 January 2018

भारतीय संविधान के उद्देशिका ( preamble of indian constitution )


preamble to the constitution
OBJECTIVES OF INDIAN CONSTITUTION


नेहरू द्वारा प्रस्तुत उद्देश्य संकल्प में जो आदर्श प्रस्तुत किया गाय उन्हें ही संविधान की उद्देशिका में शामिल कर लिया गया। संविधान के 42वें संशोधन – 1976 ई. द्वारा यथा संशोधित यह उद्देशिका निम्न प्रकार हैः-

Friday, 26 January 2018

भारतीय संविधान के स्त्रोत ( Source of Indian Constitution )



constitution of india
indian polity in hindi





संयुक्त राज्य अमेरिका –

·         न्यायपालिका की स्वतन्त्रता एंव निष्पक्षता।
·         न्यायिक पुनराविलोकन।
·         विधि के समान संरक्षण।
·         राष्ट्रपति के उपर महाभियोग की प्रक्रिया।
·         संघ के रक्षाबलो का राष्ट्रपति सर्वोच्च समादेशक।
·         उप राष्ट्रपति का पद (राज्य सभा का सभापति)।
·         संविधान की प्रस्तावना।

संविधान के भाग और अनुसूची ( articles and schedule of constitution )


                              अध्याय - 3
                        ( संविधान के भाग और अनुसूची )


indian polity hindi note



भाग 1 – संघ और उनका राज्य क्षेत्र
भाग 2 – नागरिकता
भाग 3 – मूल अधिकार
भाग 4 – राज्य के निति निदेशक तत्व
भाग 4 (क) – मूल कर्तव्य इसे (42वे सं. सं. अधिनियम 1976 के द्वारा जोड़ा गया।)
भाग 5 – संघ की कार्यपालिका, विधायिका, न्यायापालिका।
भाग 6 – राज्य की कार्यपालिका, विधायिका, न्यायापालिका।
भाग 7 – पहली अनुसूची के भाग क के राज्य इसे 7वां सं.स.अ. 1956 के द्वारा निकाल दिया गया।
भाग 8 – संघ राज्य क्षेत्र
भाग 9 – पंचायते इसे 73वां संसंअं 1992 के द्वारा जोड़ा गया।
भाग 9 (क) - नगर पालिका इसे 74वें संसंअं 1992 के द्वारा जोड़ा गया
भाग 10 – अनुसूचित जाति व जनजाति क्षेत्र।
भाग 11 – संघ और राज्यों के बीच सम्बन्ध।
भाग 12 – वित्त, सम्पत्ति, सविदाए और वाद
भाग 13 – भारत के राज्य क्षेत्र के बीतर व्यापक वाणिज्य और संमागम।
भाग 14 – संघ व राज्यों के अधीन सेवाएं
भाग 15 – निर्वाचन
भाग 16 – कुछ वर्गों के सम्बन्ध में विशेष उपबन्ध (पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जाति, जनजाति एग्लों इण्डियन समुदाय)
भाग 17 – राजभाषा ( संघ और प्रादेशिक भाषांए)
भाग 18 – आपात उपबन्ध
भाग 19 – प्रकीर्ण।
भाग 20 – संविधान संसोधन।
भाग 21 – अस्थायी संक्रमण कालीन और विशष उपबन्ध।
भाग 22 – संक्षिप्त नाम प्रारम्भ, हिन्दी में प्राजिकृत पाठ।




पहली अनुसूची – (1) राज्य (2) संघ
दूसरी अनुसूची – भाग (क) राष्ट्रपति और राज्यों के राज्यपालों के बारे में उपबन्ध
भाग (ख) निरासित
भाग (ग) लोगसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, राज्यसभा के सभापति व उपसभापति राज्य विधान सभा के अध्यक्ष उपाध्यक्ष तथा विधान परिषद के रभापति, उप सभापति।
भाग (घ) उच्चतम न्यायालय और उच्च न्ययालय के न्यायाधीश।
भाग (ड़) भारत के नियत्रंक महालेख परिक्षक के बारे में उपबन्ध।
तीसरी अनुसूची – शपत।
चौथी अनुसूची – राज्य सभा के स्थानों का आबंटन।
पाँचवी अनुसूची – अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन और नियत्रण के बारे में ।
छठी अनुसूची – असम, मेघालय त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों के जनजाति क्षेत्रों के प्रसासन के बारे में|
सातवी अनुसूची – संघ सूची (मूल संविधान में 97 जो अब वर्तमान में 100 विषय हैं।)
              राज्य सूची (मूल संविधान में 66 जो अब 61 विषय है।)
             समवर्ती सूची ( मूल संविधान में 47 विषय थे लेकिन अब वर्तमान में 52 विषय है।)
आठवी अनुसूची – भाषाएँ ( कूल 22 भाषाएँ है। )
नौवी अनुसूची – भूमि सुधार सम्बन्धी, (इसे पहला संसोधन 1951 में जोड़ा गया। )
दशवी अनुसूची – इसे 52वाँ संविधान संसोधन अधिनियम 1985 में शामिल किया गया और इसमें दल परिवर्तन के आधान पर निरंतरता के बारे में है।

ग्यारहवी अनुसूची – पंचायते (इसे 73 वां संविधान संसोधन अधिनियम 1992 के द्वारा जोड़ा गया)
नोट -  पंचायतो से सम्बन्धित सभी प्रावदान अप्रैल 1993 से सम्पूर्ण भारत में लागू कर दिया गया अपवाद – जम्मू कश्मीर, दिल्ली, मेघालय, मिजोरम, नागालैण्ड राज्यों में लागू नहीं होता।

बारहवी अनुसूची – नगर पालिकाएं ( इसे 74 वाँ संविधान संसोधन अधिनियम 1992 द्वारा जोड़ा गया। और जून 1993 से पूरे भारत में लागू किया गया। )।
अपवाद – जम्मू कश्मीर, दिल्ली, मेघालय, मिजोरम, नागालैण्ड राज्यों में लागू नहीं होता।




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